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नालंदा : एक ऐसा देवी मंदिर जहां नवरात्र में महिलाओं के प्रवेश पर है रोक

प्रणय राज

नालंदा में एक ऐसा मंदिर है जहां नवरात्र में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. जी हां, नालंदा जिले के घोसरावा गाँव स्थित आशा देवी मंदिर में नवरात्र के अवसर पर महिलाओ के प्रवेश पर पाबंदी रहती है.

बता दें कि बिहारशरीफ से महज 16 किलोमीटर की दूरी पर घोसरावा गाँव अवस्थित है, जहां माँ आशा देवी का भव्य मंदीर है. इस मंदीर में नवरात्र के अवसर पर माता की विशेष पूजा होती है. जिसे बाम पूजा या तंत्र पूजा कहा जाता है. नवरात्र के अवसर पर लोग तंत्र की सिद्धिया प्राप्त करते हैं. जिसके कारण नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक इस मंदिर में महिलाओ के प्रवेश पर पाबन्दी लगा दी जाती है. शायद पुरे विश्व में यह माता का पहला मंदिर होगा जहां महिलाओ के प्रवेश पर सदियों से पाबन्दी लगी है.

मंदिर के पुजारी पुरेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि नवमी के दिन मीशा पूजा के बाद यहाँ पशु की बलि भी दी जाती है और दशमी की रात्रि आरती के बाद ही महिलाओं को माता के दर्शन की अनुमति दी जाती है. इस मंदीर में आशा देवी  की दो मुर्तियो  के आलावे शिव-पार्वती और भगवान बुद्ध की कई मुर्तिया हैंं. काले पत्थर की सभी प्रतिमाये बौद्ध, शुंग और पाल कालीन हैं.

जानकारों का कहना है कि 9वीं शताब्दी में बज्रयान, तंत्रयान और सहजयान का बहुत तेजी से फैलाव हुआ था. उस समय यह स्थल विश्व का सबसे बड़ा केंद्र रहा. बौद्ध धर्म के धर्मलाम्बी सभी सिद्धाचाये अपने सिद्धि के लिए इसी स्थल का उपयोग करते थे. माता के 84 सिद्धपीठों में से एक सिद्धपीठ इसे भी माना जाता है. जातक कथाओं में सिद्धि के लिए महिलाओं को बाधक माना गया है और सिद्धपीठ होने की बात उल्लेखनीय है.
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