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सीवान : रघुनाथपुर में तीन दिसम्बर को होगा नौंवा भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन, देशभर के साहित्यिक कलाकारों का लगेगा जमावड़ा

अभिषेक श्रीवास्तव

सीवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड अवस्थित पंजवार गांव में अभी का माहौल देखते ही बन रहा है. हर ओर उत्साह है, उमंग है और लोग अपने गांव में देश-दुनिया के कोने-कोने से आनेवाले भोजपुरी भाषियों के स्वागत के लिए तैयारी में लगे हैं. प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर आखर की ओर से भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन तीन दिसंबर को पंजवार में हो रहा है. आखर की ओर से यह नौवां भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन होगा. इस साल आखर की यह यात्रा दशक वर्ष में प्रवेश करेगी. साल दर साल इस आयोजन का रूप-स्वरूप और दायरा विस्तृत होता जा रहा है। हर साल की तुलना में इस साल आयोजन में और भी अधिक संख्या में भोजपुरी साहित्य,संस्कृति के प्रेमियों के पहुचने की संभावना है. कुछ सालों से यह आयोजन मेले सा रूप भी लेते जा रहा है.

आखर के बारे में

आखर देश-दुनिया के कोने-कोने में फैले भाषा, साहित्य, संस्कृतिप्रेमी भोजपुरीभाषियों का स्वैच्छिक समूह है, जिसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर एक दूसरे से जुड़कर भोजपुरीभाषी युवाओं ने की थी. अलग-अलग गांव, इलाके, राज्य के रहनेवाले इन भोजपुरीभाषियों ने आपस में अपनी भाषा, संस्कृति के सरोकार को लेकर संवाद की शुरुआत की और फिर धीरे-धीरे इसका रूप-स्वरूप बदलता गया और आखर भोजपुरीभााषियों का साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच बन गया. आखर की ओर से प्रिंट और ई पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू हुआ और कालक्रम में यह अपनी भाषा से मोह-नेह-छोह रखनेवाले, अपनी भाषा की गरिमा का खयाल रखनेवाले, गौरव से अभिभूत होनेवाले, मर्यादा को बचाने का संकल्प लेनेवाले और उस दिशा में कुछ प्रयास करनेवाले भोजपुरीभाषियों का मंच बन गया, जिसकी ओर से हर साल पंजवार में डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन तीन दिसंबर को होता है.

क्या होगा आयोजन में

इस बार आयोजन की शुरुआत गौरवयात्रा से होगी, जिसमें पंजवार व आसपास के इलाके के छात्र-छात्राएं भाग लेंगी. हजारों की संख्या में शामिल होकर छ़ात्र-छात्राओं द्वारा अपनी भाषा के गौरव का उदघोष होगा और साथ ही अपनी भाषा की मान मर्यादा को बचाने की अपील भी. स्वाभिमान सम्मेलन की शुरुआत हर साल इसी यात्रा से होती है, जिसमें हर साल छ़ात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ती जा रही है. गौरव यात्रा के बाद प्रभाप्रकाश डिग्री कॉलेज, पंजवार के पास बने विशाल सभागार में अलग.अलग तरीके के आयोजनों की शुुरआत होगी. यात्रा में शामिल बच्चे सबसे पहले अपनी प्रस्तुति देंगे और उसके बाद विधिवित दीप प्रज्जवलन के साथ सम्मेलन सह साहित्यिक-सांस्कृतिक सभा का शुभारंभ होगा. उदघाटन सत्र में इस बार लिविंग लीजेंड के तौर पर अपने समय के भोजपुरी के मशहूर व बेहद लोकप्रिय कलाकार भरत सिंह भारती उपस्थित रहेंगे और उनके द्वारा आखर के सालाना वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण होगा. कैलेंडर लोकार्पण समारोह के बाद सेमिनार व टॉक शो का आयोजन होगा, जिसमें प्रो वीरेंद्र नारायण यादव डॉ जौहर शफियाबादी, डॉ अर्जुन तिवारी, हृषिकेश सुलभ, ध्रुव गुप्त,डॉ मुन्ना पांडेय, गुरूचरण सिंह, जैसे साहित्यकार भाग लेंगे. युवा साहित्यकारों में रोहित सिंह, गरिमा रानी, आशुतोष पांडेय आदि की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. इस सत्र के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन का आयोजन होगा. ध्रुव गुप्त,डॉ0 सुभाषचंद्र यादव व तंग इनायतपुरी जैसे ख्यातिप्राप्त कवियों के साथ संजय मिश्र, सुनील तिवारी जैसे उभरते हुए कवि भी मंच से कविता पाठ करेंगे. साहित्यिक सत्र के बाद सिवान जिले के अलग-अलग संगीत महाविद्यालय से आये बच्चों की प्रस्तुति होगी. साथ ही पंजवार के बिस्मिल्लाह खान संगीत महाविद्यालय के कलाकारों की खास प्रस्तुति होगी. पिछले साल इसी कॉलेज के छात्राओं ने महेंदर मिसिर के जीवन पर आधारित पांडेय कपिल रचित उपन्यास फुलसुंघी पर नाट्य प्रस्तुति की थी, जिसकी चर्चा चहुंओर हुई थी और उसे हमेशा याद किया जाता है. इसी क्रम में आखर की ओर से कई नये कलाकारों को अपनी मातृभाषा भोजपुरी में गायन, अभिनय, विशेष प्रस्तुति आदि का अवसर दिया जाएगा. साथ ही लिविंग लिजेंड भरत सिंह भारती नयी पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए खास गायन की प्रस्तुति देंगे.
शाम छह बजे से विशेष सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत होगी. इस सत्र में मशहूर बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी खास मेहमान के रूप में उपस्थित रहेंगे. इस सत्र में मशहूर रंगकर्मी सह रंग निर्देशक संजय उपाध्याय, मशहूर लोकगायिका विजया भारती की खास उपस्थिति रहेगी व इनकी विशेष प्रस्तुति होगी. इन वरिष्ठ कलाकारों द्वारा संध्या सत्र का शुभारंभ होगा और फिर एक से बढ़कर एक कलाकारों की प्रस्तुति होगी. नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा से पासआउट और मुंबई में रह रहे शानदार कलाकार राकेश कुमार खास लौंडा नाच की प्रस्तुति देंगे. मशहूर नृत्य गुरु विपुल नायक अपनी टीम के साथ भोजपुरी गीतों के साथ शास्त्रीयता का मिलान कराते हुए विशिष्ट गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति करेंगे. अपनी गायकी से लगातार विशेष छाप छोड़नेवाली और हाल ही में नीदरलैंड में आयोजित अन्तराष्ट्रीय फोक फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सबको मुग्ध करनेवाली गायिका सुश्री चंदन तिवारी, मशहूर युवा गायक शैलेंद्र मिश्र जैसे कलाकार विशिष्ट प्रस्तुति देंगे. यह साल मनोरंजन प्रसाद सिन्हा रचित कालजयी गीत ‘फिरंगिया’ के शताब्दी वर्ष का है तो संजय उपाध्याय द्वारा फिरंगिया का गायन होगा. यह साल भोजपूरी के मशहूर गीतकार मोती बीए के जन्मशताब्दी वर्ष का भी है. चन्दन तिवारी द्वारा उनके गीतों के गायन के जरिये उनका जन्मशताब्दी वर्ष मनाया जाएगा।साथ ही गोरखपुर की युवा गायिका अंकिता पंडित व पंजवार गांव की ही गायिका निरूपमा सिंह की खास प्रस्तुति होगी. पंजवार गांव के ही रहनेवाले बांसुरी वादक मुरारीजी व कस्तूरबा इंटर कॉलेज में संगीत के शिक्षक संजय कुमार व संगीत गुरु विनय कुमार सिंह की भी खास प्रस्तुति इसी सत्र में होगी. सीवान जिले में संगीत की धारा को निरंतर गति देनेवाले गुरूद्वय अवधेश पांडेय व रमैया पांडेय की युगलबंदी भी देखने को मिलेगी. इन कलाकारों के साथ ही शैलेंद्र शर्मा व्यास, जेआर जायसवाल,श्रद्धा सिंह सिसोदिया जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे. इन सारे आयोजनों के लिए पंजवार में विशेष प्रकार की मंच सज्जा की जा रही है.

आखर की आरा टीम ने भोजपुरिया चित्रकारी का प्रयोग कर मंच के बैकग्राउंड को विशिष्ट रूप में तैयार किया है. इस बार के सम्मेलन का खास आकर्षण भोजपुरी लोकचित्र कला की प्रदर्शनी भी है. समारोह का समापन इस साल दिवंगत हुए भोजपुरी के चार लोगों के ऊपर आधारित श्रद्धांजलि गीत से होगा. लोकेगायिका चन्दन तिवारी द्वारा तिश्ता शांडिल्य, मनीषा राय,संजीव मिश्र व मोतीलाल मंजुल को श्रद्धांजलि दी जाएगी.

आखर के सालाना कैलेंडर के बारे में

आखर की ओर से तीन साल पहले सालाना भोजपुरिया कैलेंडर प्रकाशन की शुरुआत हुई है. इस कैलेंडर को वाल व टेबल कैलेंडर के रूप में छापा जाता है. इस कैलेंडर में 12 साहित्यिक, सांस्कृतिक व सरोकारी नायकों को शामिल किया जाता है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व, कृतित्व, नेतृत्व क्षमता से भोजपुरी व भोजपुरियाभाषी के उत्थान में अहम भूमिका निभायी है. इन 12 नायक-नायिकाओं में 11 दिवंगत नायक होते हैं जबकि हर साल एक लिविंग लिजेंड को शामिल किया जाता है. पहले साल के कैलेंडर में लिविंग लिजेंड शारदा सिन्हा थी तो दूसरे साल के कैलेंडर के लिविंग लिजेंड भरत शर्मा व्यास थे. इस साल लिविंग लिजेंड के तौर पर भरत सिंह भारती को शमिल किया गया है.

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