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नालंदा : प्ले स्कूल की तर्ज पर खुला सूबे का पहला बाल मित्र थाना

प्रणय राज

आम तौर और पुलिस थाना के नाम से हमारे जेहन में एक ऐसे बंदी गृह की कल्पना होती है जो लोहे की मोटी सलाखों और ईंट की मोटी मोती दीवारों से घिरी हो. लेकिन क्या कभी किसी ने ऐसे थाने के बारे में सोच है जिसकी दीवारों पर पेंटिंग्स बनी हो और वो भी रंग बिरंगे कार्टून्स और बच्चों के मनभावन कलाकारों की. बिहार के नालंदा जिले में सूबे के पहले बाल मित्र थाना की शुरुआत की गई है. जिसका उद्घाटन बीते 6 फरवरी को किशोर न्याय परिषद के न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्रा और तत्कालीन एसपी सुधीर कुमार पोरिका ने किया.

नालंदा के बिहार थाना परिसर में बने इस बाल मित्र थाना को एक प्ले स्कूल का लुक दिया गया है. थाने के दीवारो पर श्रीराम भक्त हनुमान और भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप को दर्शाया गया है. इसके अलावा डोनाल्ड डक आदि का कार्टून भी बनाये  गए है. बाल हनुमान और बाल कृष्ण के नटखटापन को दर्शाने का उद्देश्य यह  है कि लोगों को एक सन्देश मिले कि बच्चे तो नटखट होते ही हैं और थोड़ी बहुत शैतानियां इनसे हो सकती है.

न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्रा ने कहा कि बच्चे उस मिट्टी के तरह होते है जिसे आप जिस रूप में ढालना चाहे उसे ढाल सकते हैं. भगवान श्रीकृष्ण बचपन में माखन चुराते थे मगर बड़े होकर चोर या डाकू नहीं बने. उसी तरह बाल हनुमान ने बचपन में फल समझ कर सूर्य को खा लिया था, ये उनकी नादानी थी. इसी तरह बाल अपराध करने वाले बच्चे भी होते है. जो किसी के बहकावे या फिल्मों को देख कर अपराध कर बैठते है. उन्हें इस रास्ते पर जाने  से रोकने के लिए इस थाने को बनाया गया है. यहाँ छोटे मोटे अपराध करने वाले बाल अपराधी को लाया जायेगा और उसके परिजन को बुला कर कौशलिंग करा कर सौप दिया जाएगा. यहाँ इस थाने को  प्ले स्कूल का रूप दिया गया है. दिवाल पर माखन खाते भगवान श्री कृष्ण, सूर्य को खाते बाल हनुमान, मिस्टर भीम, सहित अन्य तरह के आकर्षक तस्वीरें बनायी गयी है. यहाँ आने पर बाल या किशोर विधि विरूद्ध आरोपी या पीड़ित प्ले स्कूल जैसा महसूस करेंगे.

इसके अलावा यहाँ टॉफी, बिस्कुट और खेल सामग्री भी रहेंगे। साथ ही प्रेरक प्रसंग वाली पुस्तकें भी रहेगी. तनाव का माहौल नहीं रहे इसकी सारी व्यवस्था की गयी है. थाने को पुर्णतः चाइल्ड फ्रेंडली थाने का माहौल को दिया गया है ताकि बच्चे यहाँ घर जैसा महसूस करे  इसके लिए वहां पुलिसिया बोली या रौब नहीं चलेगा. यहां तक कि हाजत और हथकड़ी का प्रयोग तो दूर इस शब्द का प्रयोग करने पर भी रोक होगी। बेड़ी या कान उमेठने, डांट फटकार और तमाचा मारने की धमकी तो यहां तैनात पदाधिकारी नहीं दे सकते है. इस थाने में थाना प्रभारी नहीं बल्कि बाल कल्याण पदाधिकारी प्रतिनियुक्त किये गए है जो यहाँ सादी वर्दी में ड्यूटी करेगें .

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